कल ही एक ग़जल कही जो आप सब की नजर है।...........
उसकी बातों मे कहीं कुछ इल्म का गुमान है.,
ये कोई बाजीगरी है सबको ये इमकान है.!
वो किसी से पूछ कर चलता नहीं था रास्ते.,
फ़िर कहां से पाई मंजिल हर कोई हैरान है!
अब के बारिश में बरसती आ रही है उसकी याद.,
सर पे कोई छ्त पडी है इस बात से अनजान है!
मै ही तुम्हारे प्यार के काबिल नही था दोस्तों।,
इतनी ही सच्चाई है बस बाकी सभी इल्जाम है!
अब अमीरी का खयाल आता नही है क्या करें।.
खल्क की ख्वाइश सभी है औ साथ में ईमान है!
अब के जब भी वो मिलेगा मै लगाउंगा गले ।.
ये कोई ख्वाइश नहीं है बस जरा एहसान है !